अध्याय 6 द वाइन स्टेन
एला उस पल भर के उकसावे वाले भाव को कभी नहीं भूल सकती थी जो कुछ क्षण पहले जूडिथ के चेहरे पर झलका था; वह जानती थी—सब कुछ सिर्फ़ दिखावा था।
उनके चारों ओर न जाने कितनी निगाहें उनकी तरफ़ मुड़ चुकी थीं—टिकी हुई, चुभती हुई। भीड़ में फुसफुसाहटें लहराने लगीं, और दो औरतों के इर्द-गिर्द अटकलों का जाल बुन गया।
“उसे मिस्टर रेमंड के साथ देखा था? मुझे तो लग रहा है, उसे फँसाने की कोशिश कर रही है,” एक औरत ने दबे स्वर में कहा।
“मिस ब्रूक्स को उसके ऊपर रेड वाइन का गिलास उड़ेल देना चाहिए था। सबक मिलता,” दूसरी ने जोड़ा।
“मिस ब्रूक्स इतनी अच्छी क्यों बन रही हैं? उसे माफ़ी माँगने की ज़रूरत ही नहीं थी।”
एला ने अपने लिए उछाले जा रहे ज़हरीले तंज साफ़ सुने।
हर निर्दयी शब्द तमाचे की तरह आकर लगता।
विडंबना दम घोंट रही थी। जूडिथ ने जानबूझकर उसके कपड़े पर वाइन गिराई थी, फिर भी सबकी नज़र में खलनायक एला ही बन गई।
ग़ुस्से से सुलगती एला ने नीचे देखा—उसके सुनहरे गाउन पर फैला चटख लाल दाग आँखों में चुभ रहा था; उसकी उँगलियाँ अनायास ही कस गईं।
वह कुछ कह पाती, उससे पहले ही जूडिथ ने पहल कर दी—बेचारी बनने का ढोंग रचते हुए, जैसे उसी के साथ ज़ुल्म हुआ हो। “ऑस्टिन, तुम्हें एला को समझाना होगा; प्लीज़ उससे कहो कि मुझ पर गुस्सा न करे!”
उसने धीरे से ऑस्टिन की बाँह का कपड़ा खींचा, और एला की ओर डरपोक-सी नज़र डाली।
ऑस्टिन ने होंठ खोले; उसकी आवाज़ बर्फ़ जैसी ठंडी थी, “जूडिथ ने जानबूझकर नहीं किया; अपना गुस्सा उस पर मत निकालो।”
कब एला ने जूडिथ को निशाना बनाया था? क्या उसने शुरू से अब तक उसके खिलाफ़ एक शब्द भी कहा था?
एला का सब्र जवाब दे गया; उसका आक्रोश उफान पर आ गया। “तुम चाहते हो कि मैं ऐसे नाटक करूँ जैसे यहाँ मौजूद सब लोग अंधे हैं?”
उसका मकसद तो बस ऑस्टिन को आसपास मौजूद गवाहों की याद दिलाना था; उसने सोचा भी नहीं था कि जूडिथ पहले ही रो पड़ेगी।
“मतलब मैं जानबूझकर तुम पर वाइन डालती? एला, तुम मेरे बारे में इतना बुरा कैसे सोच सकती हो? मेरा सच में ऐसा इरादा नहीं था…”
जूडिथ ने चेहरा ढक लिया, धीमे-धीमे सिसकने लगी—मानो उसी के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो गया हो; जिन्हें सच पता नहीं था, वे उसे ही पीड़ित समझते।
ऑस्टिन ने उसके आँसू देखते ही भौंहें कस लीं; उसकी नज़र ठंडी होकर काटने लगी। “एला, बहुत हंगामा कर लिया, अब बस?”
एला पहले से तैयार थी, फिर भी ऑस्टिन को जूडिथ का पक्ष लेते देखकर उसके दिल में कहीं गहरी, सुन्न-सी पीड़ा उठी।
उसने ऑस्टिन को बर्फ़ीली नज़र से देखा—उसमें परायापन और ऐसी निराशा थी जो चुभ कर चोट पहुँचा दे।
ऑस्टिन के होंठ पतली लकीर बन गए; उसका लहजा सख़्त था, “एला, पीड़ित बनने का नाटक बंद करो। यहाँ कोई तुम्हारा कर्ज़दार नहीं है।”
उसका दिल साफ़ तौर पर जूडिथ की तरफ़ झुका हुआ था।
जब भी एला कोई सीमा खींचना चाहती, उसे ‘ज़्यादा संवेदनशील’ या ‘ड्रामा’ कहकर टाल दिया जाता।
एला ने अपने कपड़े का किनारा कसकर पकड़ा; उँगलियों के पोर हथेली में धँस गए। उसकी आवाज़ तीखी थी, “अगर माफ़ी चाहिए तो दिल से माफ़ी माँगो। ये ड्रेस खराब हो गई है; इसकी भरपाई तुम्हें नई ड्रेस देकर करनी होगी।”
भीड़ में हलचल मच गई।
“फटी-सी ड्रेस के नाम पर पैसे ऐंठने चली है!”
“लगता है नकली डिज़ाइनर पहनकर घूम रही है—उस वाइन की बोतल जितनी भी कीमत नहीं होगी।”
“बेचारी जूडिथ कितनी भली है, ऐसी औरतों के चक्कर में पड़ती ही क्यों है।”
“माफ़ी के बाद भी ज़्यादा ही सिर चढ़ रही है।”
“कितनी बेशर्म है, जूडिथ को ऐसे पकड़कर बैठ गई!”
हक़ीक़त से अनजान तमाशबीन घृणा भरी फुसफुसाहटों में भड़क उठे।
यहाँ तक कि ऑस्टिन के चेहरे पर भी चिढ़ की छाया गहरी हो गई।
“एला, बेवजह ज़िद मत करो।” उसकी आवाज़ भारी थी, नज़र तेज़ और बेरहम। “जूडिथ माफ़ी माँग चुकी है; अब बात को आगे मत बढ़ाओ।”
एला ने हार मानने से इनकार किया और बिना पलक झपकाए उसकी आँखों में आँखें डाल दीं। “तो उसकी माफ़ी इतनी क़ीमती है कि एक ‘सॉरी’ से सारे गुनाह धुल जाते हैं?”
उसकी इस जिद पर ऑस्टिन का गुस्सा और भड़क गया, वह फट पड़ने ही वाला था कि तभी एक आवाज़ हैरानी के साथ बीच में आ गई—
“मिस ब्रूक्स, यहाँ आपसे मुलाकात हो जाएगी, क्या बात है!”
आवाज़ की ओर देखते ही एला चौंक गई—वहाँ उसके दादाजी के पुराने परिचित जेराल्ड क्लार्क खड़े थे।
वह असली वारिस थी, लेकिन तीन साल की उम्र में खो गई थी और देहात में रहने वाले, दुनिया से कटे-से दादाजी ने उसे अपने पास पाल लिया था। उसकी माँ, जैनिस क्लार्क, बेनतीजा तलाशों के बाद ग़म में घुलकर चल बसी।
अपनी माँ की मौत का बोझ ढोते हुए उसके पिता, जॉन ब्रूक्स, अपनी रखैल कैरल बेकर को साथ ले आए—और जूडिथ को भी, जो उससे दो साल बड़ी थी—और फिर एक “वैध” शादी रचा दी।
इस सदमे से उसकी दादी को लकवा मार गया और वे फिर कभी संभल नहीं पाईं।
आख़िरकार, जब वह दस साल की हुई, तो उसके दादा औपचारिक तौर पर उसे घर ले आए।
मगर किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि जूडिथ एक विलक्षण डिज़ाइनर बनकर उभरी—ब्रूक्स परिवार की “कानूनी” वारिस मानकर सबने उसे सिर-आँखों पर बैठाया—जबकि एला गुमनाम ही रही।
उसका पति उसकी सौतेली बहन के साथ, बाहर से देखने पर, एकदम परफेक्ट रिश्ते में बँधा हुआ था।
उसने अपनी असल पहचान कभी उजागर नहीं की; इसलिए हर किसी ने उसे पैरों तले रौंदना अपना हक़ समझ लिया।
एला ने चुपचाप सिर हिलाकर बात स्वीकार कर ली।
उसके बगल में जूडिथ चमकती मुस्कान लिए आगे बढ़ी। “मिस्टर बेल्स, मिस्टर डॉबिन्स, पापा आपका ज़िक्र बहुत करते हैं; मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप इस दावत में होंगे…”
उन्होंने औपचारिक-से, सरसरी सिर हिलाकर अभिवादन किया।
जूडिथ के भीतर खुशी की लहर दौड़ गई, उसकी मुस्कान और खिल उठी।
डैरन बेल्स समिट टेक्नोलॉजीज़ ग्रुप के पीछे का दिग्गज था। वेलेंटिन डॉबिन्स ‘अल्फा प्रोजेक्ट’ का मुख्य शोधकर्ता और निवेशक। दोनों विज्ञान और निवेश की दुनिया के महारथी थे।
जूडिथ की डैरन से कभी अपने पिता के साथ एक आउटिंग में मुलाकात हुई थी—बस एक क्षणिक-सी पहचान।
वेलेंटिन से यह उसकी पहली मुलाकात थी, हालांकि उसके बारे में वह बहुत सुन चुकी थी और जुड़ाव बनाने की तमन्ना रखती थी।
अब यहाँ अचानक उनका सामना हो जाना—रिश्ते पक्के करने और चुपके से एला को नीचा दिखाने—दोनों के लिए सुनहरा मौका था; सचमुच एक तीर से दो निशाने।
जैसा अनुमान था, भीड़ फिर से गूँज उठी।
“मिस्टर बेल्स, क्या वही समिट टेक्नोलॉजीज़ ग्रुप के मशहूर प्रमुख हैं?”
“सुना है उन्होंने और मिस्टर डॉबिन्स ने मिलकर अल्फा प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसमें क्लार्क परिवार ने निवेश किया है। तभी तो जूडिथ उनसे इतनी घुली-मिली है।”
“जूडिथ कितनी भाग्यशाली है, ऐसे दुलार करने वाले दादा जो हैं।”
जूडिथ ने अपने गहरे लाल होंठों पर मुस्कान सजाई और तारीफ़ों की धूप में नहा उठी। एला का दिल नफ़रत से भर गया।
जूडिथ ने शोक के दिनों में एक बार भी उनकी गंभीर रूप से बीमार दादी को देखने तक की ज़हमत नहीं उठाई थी—फिर भी आज वही दादा की लाडली पोती बनी बैठी थी।
टकराव से बचते हुए और चुपचाप सहते हुए उसने बहुत समय निकाल दिया था; मगर आज एला ने तय कर लिया कि अब वह खुद को नहीं रोकेगी।
वह आगे बढ़ी, होंठ हल्के से खुले, “मिस्टर बेल्स, मिस्टर डॉबिन्स, क्या आप अल्फा प्रोजेक्ट पर चर्चा करने आए हैं?”
डैरन ने जूडिथ की ओर एक नज़र डाली, फिर एला की तरफ़ विनम्र मुस्कान के साथ कहा, “आपके दादा की तबीयत गिर गई है, इसलिए वे हमारे साथ समन्वय नहीं कर पा रहे। हमें चिंता थी कि कहीं काम में अड़चन न आ जाए, इसलिए हम किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ रहे थे जो तालमेल बिठा सके।”
एला ने तत्परता से कहा, “मैं लंबे समय से अल्फा प्रोजेक्ट पर नज़र रखे हुए हूँ और मैंने पर्याप्त रिसर्च सामग्री भी जुटाई है। अगर आप मुझ पर भरोसा करें, तो मुझे खुशी होगी कि मैं मदद करूँ।”
“एला, अल्फा प्रोजेक्ट बहुत अहम एआई रिसर्च है। मिस्टर बेल्स को परेशानी में मत डालो।” जूडिथ ने घबराई हुई आवाज़ में टोका; उसके चेहरे पर बेचैनी झलक रही थी।
“मैं जानती हूँ। मैंने कभी कहा था कि मैं तुम्हें बहन मानती हूँ, मगर इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हें सच में ब्रूक्स परिवार का नाम ओढ़ लेने का हक़ मिल जाता है। अल्फा प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है, और…” जूडिथ ने जानबूझकर एक पल रुककर बात को और धार दी, “तुम मिस्टर बेल्स से ज़्यादा परिचित भी नहीं हो। कहीं तुम उन्हें नाराज़ कर बैठी तो…”
वह वाक्य अधूरा छोड़ गई—ताकि भीड़ अपनी-अपनी कल्पनाएँ भर दे।
चारों ओर से तिरछी निगाहों का भार महसूस करते हुए एला की उँगलियों के नाखून उसकी हथेलियों में बेरहमी से धँस गए।
वह जवाब देने ही वाली थी कि डैरन की जिज्ञासु नज़रें उस पर टिक गईं। “मिस, मेरी याद के मुताबिक़ मिस्टर जॉन ब्रूक्स की सिर्फ़ एक ही पोती है—एला। पूछ सकता हूँ, आप कौन हैं?”
डैरन की अनजान-सी सीधी बात सुनते ही जूडिथ का चेहरा पल भर में सुर्ख़ लाल हो गया। “मिस्टर बेल्स, मैं जूडिथ हूँ! हम पहले मिल चुके हैं!”
भौंहें सिकोड़कर डैरन ने जैसे सोचने का नाटक किया, फिर सिर हिला दिया।
“माफ़ कीजिए, मुझे याद नहीं आ रहा।”
जूडिथ अपने होने पर ज़ोर दे पाती, उससे पहले ही उसकी नज़र एला के सने हुए गाउन पर चली गई। “वो लिमिटेड एडिशन गाउन है। अफ़सोस, उस पर दाग लग गया।”
जूडिथ का रंग अचानक उड़ गया।
क्या? लिमिटेड एडिशन?
